
आज के समय में, भारत जैसे बड़े देश में ज़मीन की कीमतें बहुत तेज़ी से बढ़ रही हैं। खासकर, दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में, ज़मीन खरीदना लगभग असंभव सा हो गया है। इन महानगरों में संपत्ति की आसमान छूती कीमतों के कारण, आम आदमी के लिए अपने घर या ज़मीन का सपना पूरा करना किसी पहाड़ चढ़ने जैसा मुश्किल काम बन गया है।
भारत में सबसे ज़्यादा ज़मीन का मालिक कौन है?
अगर आप यह सोच रहे हैं कि भारत में सबसे ज़्यादा ज़मीन का मालिक कोई बहुत बड़ा बिज़नेसमैन या कोई अमीर व्यक्ति है, तो आप गलत हैं। यह जानकर आपको हैरानी होगी कि भारत में सबसे अधिक ज़मीन के मालिक कोई व्यक्ति नहीं है, बल्कि एक सरकारी या धार्मिक संस्था है।
भारत में सबसे ज़्यादा ज़मीन का स्वामित्व (Ownership) सरकार के पास है। लेकिन, इससे भी ज़्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि सरकार के बाद, देश में सबसे ज़्यादा ज़मीन का मालिक कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संस्था है, जिसका नाम जानकर आप शायद चौंक जाएँगे। यह दर्शाता है कि भारत में भूमि स्वामित्व का पैटर्न कितना जटिल और अनोखा है।
भारत सरकार की कितनी ज़मीन है और कौन इसका उपयोग करता है?
गवर्नमेंट लैंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम (GLIS) के 2021 के आँकड़ों के अनुसार, भारत सरकार के पास कुल 15,531 वर्ग किलोमीटर ज़मीन थी। इस विशाल भूमि में से अधिकांश का उपयोग केंद्र सरकार के विभिन्न विभाग करते हैं। विशेष रूप से, इस ज़मीन का एक बड़ा हिस्सा 116 सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) और 51 केंद्रीय मंत्रालयों द्वारा विभिन्न कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत सरकार के स्वामित्व (ownership) में जितनी ज़मीन है, उसका कुल क्षेत्रफल दुनिया के लगभग 50 देशों के पूरे क्षेत्रफल से भी ज़्यादा है। यह आंकड़ा भारत सरकार की विशाल भू-संपदा (land holdings) और उसकी व्यापक पहुँच को दर्शाता है।
भारत सरकार के बाद कैथोलिक चर्च के पास है सबसे ज़्यादा ज़मीन
एक अनुमान के मुताबिक, भारत में सबसे ज़्यादा ज़मीन रखने वाला दूसरा सबसे बड़ा “ज़मींदार” कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि कैथोलिक चर्च ऑफ इंडिया है। पूरे देश में इस संस्था के पास लगभग 7 करोड़ हेक्टेयर ज़मीन होने का अनुमान है। इस तरह, ज़मीन के मामले में कैथोलिक चर्च ऑफ इंडिया, भारत सरकार के बाद दूसरे स्थान पर है।
1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति
इस ज़मीन की सबसे खास बात यह है कि इस पर स्कूल, कॉलेज और कई बड़ी इमारतें बनी हुई हैं। बाज़ार में इसकी कीमत 1 लाख करोड़ रुपये से भी ज़्यादा आँकी गई है, जो इसे एक अत्यंत मूल्यवान संपत्ति बनाती है।
कैथोलिक चर्च (Catholic Church) के पास मौजूद अधिकतर ज़मीनें देश की आज़ादी से पहले की हैं। इनमें से अधिकांश ज़मीनें चर्च को ब्रिटिश शासनकाल के दौरान मिली थीं। अंग्रेज़ों ने ये ज़मीनें ईसाई धर्म के प्रचार और प्रसार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चर्च को बहुत सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई थीं।
















